ताऊ, खांचा और सरदार को मेरा जय हो, जय हो, है हो!
आज का दिन कुछ महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर आज के बाद के सात दिन मेरी अच्छी तबीयत से बीत गए, तो शायद मेरे भीतर एक नई ऊर्जा का संचार हो।
मैं थक चुका हूँ, फिलहाल अपने रोज़मर्रा के कामों से भी और विचारों के इस निरंतर संचार से भी।
किस्सा कुछ है नहीं, पर कहने को वेद-पुराणों से भी ज़्यादा है मेरे पास। भरा बैठा व्यक्ति कैसा होता है, यह आज समझ पा रहा हूँ। या यूँ कहूँ कि ख़ुद अपने भीतर विचारों का इतना बोझ लेकर बैठा हूँ कि अब उस एहसास को महसूस कर पा रहा हूँ।
शायद माँ-पिता के साथ अगले कुछ दिनों का समय मुझे आने वाले कुछ महीनों को काटने, या यूँ कहें कि जीने की ऊर्जा दे जाए।
एक अधेड़ में फँसा हूँ। समझ नहीं आता कि यह नौकरी छोड़ दूँ या कुछ नया करने का समय अब निकल चुका है।
व्यक्ति पूरी ज़िंदगी भागता रहता है, मगर भाग नहीं पाता वहाँ से, जहाँ से वह वास …read more